महाशिवरात्रि महोत्सव पंचमुखी भगवान महादेव के दर्शन के लिए पहुंचे हजारों की संख्या में श्रद्धालु, वटवृक्ष धाम ग्राम बोखी ।
महादेव को उनके भक्त कई नामों से पुकारते हैं उन्हीं में से एक नाम है "पंचानन पंचमुखी" शिव को अर्थात पांच मुखी वाला भी कहा जाता है, पंचमुख स्वरूप के रहस्य- ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में जब कुछ नहीं था तब प्रथम देव शिव ने ही सृष्टि की रचना के लिए पंचमुख धारण किए या कहें कि शिवजी ने जीवन को उत्पन्न किया इसलिए पंचमुखी कहलाए त्रिनेत्र धारी शिव के पांच मुख से ही पांच तत्व जल, वायु, अग्नि, आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति हुई इसलिए श्री शिव के यह पांच मुख पंचतत्व भी माने गए हैं, जगत के कल्याण की कामना से भगवान सदाशिव के विभिन्न कल्पों में अनेक अवतार हुए जिनमें उनके सददोजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान अवतार प्रमुख हैं, यही भगवान शिव की पांच विशिष्ट मूर्तियां हैं।
श्री गौमाता रक्षा हिंदू जन जागरण हिंदुस्तान शिव मंदिर पंचमुखी वटवृक्ष धाम में महाशिवरात्रि के महोत्सव में भक्तजन पहुंचकर भगवान के श्री चरणों में शीश झुका कर उनके दर्शन एवं आशीर्वाद का लाभ लिए, ऐसा माना जाता है कि वटवृक्ष में भगवान शिव ने पंचमुख स्वरूप धारण किया हुआ है, और पंचमुखी वटवृक्ष के पूजन से कई भक्तजन ने अपनी मनोकामनाएं भी पूर्ण किया है, दूर-दूर से श्रद्धालु आकर यहां भगवान को अपनी पीड़ा व सुख से आभास करा कर भगवान को धन्यवाद देकर आभार प्रकट करते हैं, वटवृक्ष धाम के पुजारी श्री घूरन राम ने बताया कि शिवरात्रि के पूर्व से याने माघ मास में दिन-रात 108 दियों का जलते रहना इस बात का संकेत है कि भगवान यहां विराजमान है, उन्होंने बताया कि जो भी भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ पंचमुखी वटवृक्ष से अपनी इच्छा कहता है, उनके मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं।
ग्राम बोखी के युवा समिति द्वारा भक्तजन के आने जाने से खाने-पीने तक का पूरा ख्याल रखा जाता है, पंडित श्री दास के मंत्रोचार से यहां का वातावरण भक्तिमय हो गया, यहां का एकांत वातावरण बहुत ही मनोहर प्रतीत होता है।
भक्तजन महाशिवरात्रि की इस बेला पर नाट्य कला का प्रदर्शन कर रात्रि जागरण कर भगवान के श्री चरणों में शीश भी नवाते रहे, युवा समिति सुखनाथ, तुलसी अरविन्द,अनिल,दिनेश,वुटू, विक्रम ,सुनील घनश्याम, प्रहलाद एवं अन्य युवाओं ने महाशिवरात्रि के उपलक्ष में पूजन समारोह में सराहनीय भूमिका निभाई।














