अंकिरा में जनपद निधि घोटाले की आशंका: मैदान समतलीकरण के नाम पर 4.57 लाख की राशि पर उठे सवाल
जशपुर। विकासखंड फरसाबहार के ग्राम अंकिरा में जनपद विकास निधि के तहत स्वीकृत राशि के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आ रहा है। गांव के पेटामारा क्षेत्र में खेल मैदान के समतलीकरण के लिए 4 लाख 57 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को बेहतर खेल सुविधा उपलब्ध कराना था। लेकिन जमीनी हकीकत इस योजना के उद्देश्य से बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर खेल मैदान का समतलीकरण किया जाना था, वहां आज तक कोई कार्य नहीं हुआ है। पेटामारा स्थित खेल मैदान आज भी अपनी पुरानी स्थिति में है, जहां न तो समतलीकरण हुआ है और न ही खेल के लिए कोई आधारभूत सुविधा विकसित की गई है। इसके विपरीत, जगरनाथ मंदिर परिसर को ही खेल मैदान दर्शाकर वहां मुरूम डाल दिया गया और औपचारिकता पूरी करने के लिए निर्माण कार्य का बोर्ड भी लगा दिया गया है।
इस मामले ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इस निर्माण कार्य की एजेंसी ग्राम पंचायत ही है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना वास्तविक कार्य किए ही राशि खर्च दर्शा दी गई है, जो सीधे तौर पर शासकीय धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में खेल को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं चलाई जा रही हैं, ताकि गांव के युवा खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और उन्हें बेहतर मंच मिल सके। लेकिन अंकिरा में इस योजना का लाभ युवाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। यदि यह राशि वास्तविक खेल मैदान में खर्च की गई होती, तो गांव के खिलाड़ी नियमित अभ्यास कर सकते थे और क्रिकेट, फुटबॉल जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित करने के लिए उन्हें निजी खेतों का सहारा नहीं लेना पड़ता।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी बिना स्थल निरीक्षण किए ही फाइलों में कार्य पूर्ण मानकर राशि जारी कर देते हैं। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के चलते इस प्रकार की अनियमितताएं हो रही हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में भी इस प्रकार की अनियमितताएं जारी रहेंगी और योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक नहीं पहुंच पाएगा।
यह मामला न केवल जनपद निधि के उपयोग पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी के कारण विकास कार्य कागजों तक सीमित रह जाते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।













