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कहीं अतीत का स्वप्न बन कर न रह जाए शुद्ध पेयजल*: *एस पी यादव

 



कहीं अतीत का स्वप्न बन कर न रह जाए शुद्ध पेयजल*: *एस पी यादव


भूजलस्तर लगातार गिरता जा रहा है, जल के प्राकृतिक स्रोत एवं नदियां समय पूर्व सूख रहे हैं ,आने वाले दिनों में जल संकट की समस्या काफी विकराल रूप ले लेगी ,यदि भूजल का ऐसे ही दोहन होता रहा तो निकट भविष्य में पानी अतीत का स्वप्न बन कर रह जायेगा एवं पीने के लिए शुद्ध जल मिलना भी मुश्किल हो जाएगा ।उक्त बातें पर्यावरणविद एवं विशेषज्ञ एस पी यादव जशपुर ने सेंट मेरिस कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दुलदुला एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दुलदुला में स्कूली छात्रों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही, इनोवेशन फोरम के तत्वावधान शुक्रवार को आओ भविष्य के लिए बचाएं जल अभियान के तहत जल संकट एवं जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा के लिए एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, इस कार्यशाला में 950 से अधिक स्टूडेंट्स शामिल हुए ।



उन्होंने कहा जशपुर जिले की मौजूदा स्थिति अच्छी नहीं है ,केंद्रीय जल बोर्ड ने जिले को रेड जोन में शामिल किया है ,एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां भूमिगत जल 30 मीटर से नीचे जा चुका है ।आने वाले दिनों में जशपुर में भी पानी की समस्या और विकराल रूप लेगी। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि जल प्रकृति से मिला अनमोल उपहार है इसे विश्व की संपूर्ण प्रयोगशालाएं मिलकर भी नहीं बना सकती, पानी सिर्फ बचाया जा सकता है। लगातार हो रहे पेड़ों की कटाई के कारण एक ओर जहां ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन सी स्थिति पैदा हो गई है ।वनस्पतियों और वन्य जीवों के अस्तित्व पर खतरा है ,जल संकट एवं जैव विविधता के ह्रास के लिए मानवीय गतिविधियां प्रमुख कारक है, हमें अपने नैतिक जिम्मेदारियों को समझना होगा ,

जलवायु परिवर्तन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक समस्या बन चुका है, इसके लिए भी मानवीय गतिविधियां ही जिम्मेदार कारक हैं, सामान्यतः जलवायु में परिवर्तन कई वर्षों में धीरे-धीरे होता है लेकिन मनुष्य के द्वारा लगातार पेड़ों की कटाई और जंगल को खेत या मकान बनाने के लिए उपयोग करने के कारण इसका प्रभाव जलवायु में भी पड़ने लगा है, आने वाले दिनों में इसके कारण कई प्राकृतिक आपदाएं भी घटित होंगी।

उन्होंने स्टूडेंट्स को जल के विवेकपूर्ण उपयोग एवं संरक्षण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया एवं आइडिया दिए एवं स्टूडेंट्स को जल सरंक्षण एवं जैव विविधता की रक्षा के लिए शपथ दिलाई।उन्होंने बताया भूजल स्तर की ओर विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि अंधाधुध जलदोहन व जलवायु परिवर्तन का ऐसा ही हाल रहा तो आने वाले एक दशक में 60 फ़ीसदी कस्बे सूखे की चपेट में आ जाएंगे।



उन्होंने यह भी बताया वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है ,इसमें गंभीर संकट झेलने वाले 17 देश शामिल हैं ,यह देश जल्द ही डे जीरो जैसी स्थिति का सामना कर सकते हैं। अगर भविष्य में ऐसे हालात रहे तो जल संकट की समस्या विकराल रूप ले लेगी।

कार्यशाला में डॉ दीनानाथ ने जलवायु परिवर्तन एवं जल सरंक्षण के विभिन्न पहलुओं की चर्चा की एवं स्टूडेंट्स को वर्षा जल संग्रहण के आइडिया दिए।इस मौके पर पर्यावरण कार्यकर्ता एम कुमार सहित विद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे।