जिला प्रशासन के निर्देश के बाद कन्हर नदी के उद्गम स्थल को सरंक्षित करने की दिशा में कार्य शुरू।
जिले में रेड जोन की स्थिति, गहराते जल संकट को देखते हुए पर्यावरण मित्र मंडल जशपुर,जिला प्रशासन एवं वन विभाग जशपुर ने नदियों के सरंक्षण की दिशा में अभियान तेज कर दिया है ,जिससे समय रहते नदियों के उद्गम स्थलों को सरंक्षण मिले एवं नदियों का अस्तित्व बना रहे।जिला कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल के विशेष निर्देश के बाद अब कन्हर नदी सहित जिले में बहने वाली नदियों के उद्गम स्थलों को सरंक्षित करने की दिशा में कार्य शुरु किया गया है,उद्गम स्थल की सफाई सहित सुरक्षा घेरा एवं प्रवाह क्षेत्र में अनवरत जल प्रवाह का मार्ग तैयार किया जा रहा है । एस पी यादव ने बताया कि 2019 से लेकर अब तक कन्हर ,ईब एवं राजपुरी नदी के उद्गम स्थलों के सरंक्षण को लेकर अब तक उनकी टीम के द्वारा कई बार चरणबद्ध अभियान चलाया गया है , उद्गम स्थलों व की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे ।
सफाई एवं सुरक्षा के कारण यहां कन्हर उद्गम स्थल का वाटर लेवल काफी अच्छा है एवं लोगों को सिंचाई के लिए जलापूर्ति भी हो रही है ,पर्याप्त जल उपलब्ध होने के कारण इस इलाके में अब किसान धान के साथ साथ नाशपाती की फसल भी ऊगा रहे हैं ।
यह नदी जिले की प्रमुख एवं जीवनदायिनी नदी हैं ,पेयजल का प्रमुख स्रोत होने के साथ साथ यह सिंचाई का भी प्रमुख साधन हैं ।
➡️4 राज्यों की सीमा रेखा निर्धारित करती है कन्हर नदी
कन्हर इलाके की जीवनदायिनी होने के साथ साथ यह छत्तीसगढ़ , उत्तरप्रदेश ,झारखंड एवं मध्यप्रदेश राज्य की सीमा रेखा निर्धारित करती है, जशपुर जिले के मनोरा जनपद के लौमुरहा गांव के 2 छोटे जल कुंडों से निकलकर 115 किमी का सफर मध्यप्रदेश के शहडोल एवं सतना जिले की सीमा पर स्थित सोन नदी में जाकर समाप्त होता है ,दातरम,पेंगन, सिंदूर ,गलफुला इसकी सहायक नदियां हैं। बलरामपुर जिले में इस नदी पर कन्हर प्रोजेक्ट स्थापित है।
➡️अब आगे क्या
पर्यावरण विशेषज्ञ एस पी यादव ने बताया कि जिला प्रशासन एवं वन विभाग के विशेष सहयोग से
नदियों के उद्गम स्थलों को बचाने का कार्य चरणबद्ध चलेगा ,सरंक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी ,उद्गम स्थल की सुरक्षा के लिए पौधरोपण भी किया जाएगा एवं साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को नदियों के सरंक्षण के लिए जागरूक किया जाएगा ।लगातार नदियों के उद्गम स्थलों के अतिदोहन एवं अतिक्रमण के कारण इन नदियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है ,कुछ समय पूर्व सुख चुके हैं ,एवं कई सूखने के कगार पर हैं । जल के अतिदोहन को रोककर ,वर्षा जल को संचित कर जल का समुचित सरंक्षण एवं संवर्धन किया जा सकता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट के अनुसार यदि हम औसत वर्षा की आधी मात्रा को भी प्रत्येक गांव की 1.12 हेक्टेयर भूमि में एकत्र कर लिया जाए तो जिले में कहीं भी पीने के पानी की समस्या नहीं रहेगी।














