शिकायत के बावजूद भी अबतक कोई कार्यवाही नही। अतिक्रमणकारियों को अधिकारियों और सत्तापक्ष के नेताओं का संरक्षण प्राप्त ।
एस डी एम और तहसीलदार भी कार्यवाही करने से मुकरे ।
राजनांदगांव:- छुरिया नगर पंचायत विगत कुछ वर्षो से अतिक्रमण का गढ़ बना हुआ है।यहाँ किसी भी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर कब्जा करो,मकान बनाओ या बेचो नगर पंचायत की मौन स्वकृति दी जाती है। मिली जानकारी अनुसार सत्ता पक्ष के बड़े नेता और आला अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है क्योंकि उनके घरों में काम करने अतिक्रमणकारी के परिवार जाते हैं| नगर पंचायत छुरिया में अतिक्रमण का यह मामला नगर पंचायत के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही सिर्फ नोटिस तामील होने तक सीमित रहती है।वर्तमान में मामला नगर पंचायत छुरिया के वार्ड क्र.06 के शासकीय जमीन पर बिंदा बाई पति स्व.गणेश राम सोरी द्वारा कब्जा कर उस भूमि को गीतम साहू निवासी ग्राम पंचायत हालेकोसा को बेचा गया है। जिस पर गीतम साहू द्वारा नगर पंचायत के बिना अनुमति के उक्त शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण किया जा रहा है।जिसकी शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा किया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इससे पहले भी उसी जमीन से लगे शासकीय जमीन को दो हिस्सों में काटकर एक को लाल सिंह उईके को और दूसरी जमीन रफीक कुरैशी को बेच चुके हैं|और इस बार गीतम साहू को बेच दिया गया जिसपर लाल सिंह उईके और रफीक कुरैशी दोनों मकान बना चुके हैं वहीं गीतम साहू के द्वारा दुकान बनाया गया है। नगर पंचायत के परमिशन के बगैर और नगर पंचायत खानापूर्ति करते हुए सिर्फ नोटिस तामीली का कार्य किया गया है।
01 वहा 8 से 10 परिवार उनके मकान में किराए से रहते हैं जो कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर मकान बनाए हैं और उनका किराया बिंदाबाई पति स्वर्गीय गणेश राम सोरी द्वारा लिया जाता है।
02 सभी परिवार एक ही जगह पर रहते हैं उसके बावजूद अलग-अलग अपने बच्चों के नाम पट्टे की मांग कर रहे हैं। नगर पंचायत के इस ढीले ढाले रवैये की वजह से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद है।
जिससे नगर पंचायत क्षेत्र के शासकीय भूमियो पर अतिक्रमण,कब्जा व भवन निर्माण आम बात हो गई है। नगर पंचायत में अतिक्रमणकारियों को नोटिस देना व उनसे लेनदेन कर मौन स्वकृति देना एक प्रथा बन गई है। जब से नगर पंचायत छुरिया अस्तित्व में आया है तब से आज तक किसी भी अतिक्रमणकारी के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही नही की गई है। दुर्भाग्य की बात यह है कि इस संवेदनशील मामले पर नगर पंचायत अध्यक्ष व वार्ड पार्षद मौन सहमति बनाये हुए है।शायद उन जनप्रतिनिधियों के मौन रहने के कारण उनके स्वयं के द्वारा अतिक्रमण हो सकता है।नगर पंचायत छुरिया में शासकीय भूमि में अतिक्रमण एवं उसके लेनदेन का व्यवसाय बहुत फल-फूल रहा है यदि इस पर समय रहते कार्यवाही न कि गई तो भविष्य में इसके गंभीर दुष्परिणाम हो सकते है।












