राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन "बिहान"के समस्त केडरों का शासन से वेतन वृद्धि की मांग पर जोर ।
फरसाबहार बिहान योजना के तहत महिला स्व सहायता समूह में कार्यरत महिलाओं के सब्र की बांध टूट चुकी है, छोटे छोटे बच्चों को लेकर हड़ताल में बैठ गई है, उनका कहना है कि कार्यभार अधिक और पगार कम,ग्रामीण क्षेत्र के सभी कार्यों को दिन-रात एक करके पूरा कर रहे हैं, जिसमें इन्हें परेशानी भी होती है, शासन इन्हें जितना देती है उससे अधिक इनसे मेहनत कराती है, जिससे क्षुब्ध होकर महिलाएं सड़क पर उतर कर हल्ला बोल आरंभ कर दिया है,।
इनकी चार सूत्रीय मांग इस प्रकार है पहला नियुक्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाए, जो इनके पदभार कार्यकाल से नसीब नहीं हुई है। दूसरा नियमितीकरण किया जाए। तीसरा प्रतिमाह मानदेय दिया जाए ।, चौथा मानदेय में वृद्धि किया जाए इत्यादि। एन आर एल एम के समस्त कैडरों की वर्तमान मानदेय और इनकी मांगे पीआरपी 13250 को वृद्धि कर 22000 किया जाए, एफ एल सी आर पी 5000 को 15000 किया जाए,आरबीके 2200 से 8000 किया जाए,एडब्ल्यू 15 से 5000 किया जाए, बैंक मित्र 2500से 8000 किया जाए, कृषि सखी पंद्रह सौ से 5000 किया जाए, पशु सखी पंद्रह सौ से 5000 किया जाए। बैंक मित्रों सहित अन्य ग्रामीण अंचल में काम करने वाली महिलाओं का कहना है कि जितना शासन उन्हें देती है उससे अधिक पेट्रोलिंग में खर्च हो जाते हैं, तो गुजारा कैसे होगा।
जनपद कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन करती महिलाएं धूप और गर्मी को सहते हुए छोटे बच्चों को अपनी गोद में लिए हुए शासन को अपनी हालात और दर्द बयान करने पर मजबूर है, इनसे पूछे जाने पर कहते हैं जब तक शासन से हमें राहत नहीं मिल जाता, तब तक हम हड़ताल जारी रखेंगे अगर शासन को तनिक भी हमारी फिक्र है तो शासन को हमारी शर्त माननी होगी।
बिहान योजना के तहत संचालित कार्य ठप हो चुके हैं, स्कूलों मैं मध्यान भोजन बच्चों को नहीं मिल रहा, गोठान के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, और इन से जुड़ी अन्य कार्य ठप हो चुकी है, इस पर शासन जल्द ही कोई कदम नहीं उठाती है तो इसका खामियाजा शासन को ही चुकानी पड़ सकती है, बाहर हाल आगे देखने वाली बात होगी कि इनकी मांगों को शासन कब तक संज्ञान में लेती है और महिलाओं के मुरझाए चेहरे पर मुस्कान कब लौटाती है।













